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Arun Maheshwari

मोदी जी की कूटनीतिक विफलताओं का चक्र पूरा होने को है

मोदी सरकार को अभी आठ महीने पूरे हुए हैं। इसीबीच उनकी कूटनीति  विफलताओं का जैसे एक संपूर्ण वृत्त पूरा करने जा रही है। सबसे पहले, अपनी ताजपोशी के समय ही उन्होंने पड़ौसी देशों और सार्क को छुआ था। छ: महीने

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हिन्दी में पुरस्कारों की बरसात और लेखकों की गिरती साख !

चंद रोज पहले टीवी के एक हिन्दी चैनल में नीचे की पट्टी पर हिन्दी के कुछ लेखकों को मिले पुरस्कारों की सूचना देख रहा था । फ़ेसबुक पर तो हर रोज़ कोई न कोई लेखक अपने पुरस्कृत होने का जश्न

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शिक्षक दिवस

हम उन सौभाग्यशालियों में नहीं जिन्हें स्कूल कालेज का कोई शिक्षक याद हो। फिर भी, गुरू तरु की जिस छाया का अहसास आज भी कायम है, वह डा. महादेव साहा की है, जिनके साथ ही पहली बार नेशनल लाइब्रेरी की

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मोदी सरकार, आरएसएस और मीडिया माफिया

मोदी सरकार बन गई। जमीन-आसमान, सर्वत्र जिसका भारी शोर था, अब वह प्रत्यक्ष आ धमकी। लोग फटी आंखों देख रहे हैं – आगे क्या ? आम चुनाव आम लोगों की कठोर और अन्यथा उबाऊ जिंदगी में अनेकों के लिये मनोरंजन

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चीन : एक नयी चुनौती

हम नहीं जानते चीनी विशिष्टता वाले समाजवाद ने दुनिया के वर्तमान समाजवादी आंदोलन को कितना बल पहुंचाया है। इसके तहत चीन का आधुनिकीकरण हुआ है। आज भी वह प्रक्रिया जारी है। जोसेफ स्टिग्लिज जैसे अर्थशास्त्री कहते हैं, दुनिया का भविष्य

Chaturdik
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गैब्रियल गार्सिया मारक्वेज

सारी दुनिया को अपने उपन्यासों से मुग्ध कर देने वाले नोबेलजयी ‘जादूई’ लेखक गैब्रियल गार्सिया मारक्वेज हमारे बीच नहीं रहे। वे पिछले कुछ दिनों से बीमार थे। हाल ही में नीमोनिया के इलाज के लिये उन्हें मेक्सिको के एक अस्पताल

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‘आंखो देखी’ – A Review

कल एक बहुत अच्छी फिल्म देखी – आंखो देखी। ‘मैं कहता हौं आखन देखी, तू कहता कागद की लेखी। भारत के उस निम्न-मध्यवित्त के परिवार का सच, जिसकी संख्या 70 करोड़ बतायी जाती है और जिसके आगे और उत्थान पर